"॥धूणी॥" by Yayawargi (Divangi Joshi) read free on Matrubharti
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ek kahani likhi hai !
सुकूनकी तलाश मे न हमपे बेढंग सा जुनून सवार हो जाता है लेकिन क्या करना है ये तो हमने कब है जाना बस किसी ओर की ज़िंदगी को देखके हमे है रोना ओर तुम ज़िंदगी मे कुछ भी कर लो कोई होगा जो हमेशा तुमसे आगे होगा तो उसे देखके रोना ,कभी नहीं रोना क्यूकी वहा थोड़े नीचे भी कोई है जिससे तुम अच्छे हो जिससे अच्छा तुम कर रहे हो या फिर तुम जो कर रहे हो वो करना भी जिसे तुम जी रहे हो उसके लिए सिर्फ एक सपना मात्र है! अब सोग मनाओ या फिर खुश रहो आपके हाथ मे है, वो गाना है ना थोड़ा पुराना है के ‘बर्बादीयों का सोग मनाना फिजूल था , मे बर्बादीयों का जश्न मनाता चला गया !