सुदंर कविता ...
आजकल खौफ में ,हर कोई जीता मरता ।
आतंक जग में फैला ,जिदंगी तू बख्श दें ।।
दानवता का ताडंव ,चारोंओर फैल रहा ।
मानवता हो रही धायल ,जिदंगी तू बख्श दें ।।
बिमारियों के खौफ में ,जीना किया हराम सबका ।
कोरोना का तांडव छाया ,जिदंगी तू बख्श दें ।।
हर कोई दिल में ,जग मे मेल लिए धुमता सदा ।
भाईचारे का नाता भुला ,जिदंगी तू बख्श दें ।।
प्रकृति पर प्रदुषण बढा ,सांस लेना हराम हुआ ।
शुद्ध हवा के लिए तरसे ,जिदंगी तू बख्श दें ।।
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