महसूस किया है कभी वह दर्द जो साल दर साल से देते आ रहे हैं उन घरों की चार दीवारों में कैद बेबस लाचार स्त्रियों की इच्छाओं का ।
महसूस किया है कभी वो दर्द जो तुमने जाने- अनजाने में पिंजरों में कैद उन बेबस और लाचार,बेजुबान पक्षियों को दिया है।।
महसूस कर पा रहे हो न आज स्वयं के घर मे कैद होने का दर्द जो घर से बाहर न निकल पाने की बजह से तुम्हे हो रहा है।
#FIGHTCORONA
#JANATACARFUE
@राघवेंद्र ‛राज’
#Right