#BARABAR #निगाहों ही निगाहों में कयामत ढा रहे हो तुम
तड़पता देखकर हमको क्यों अब घबरा रहे हो तुम
नज़र के घाव जो तुमने दिये वो छुप नहीं सकते
छुपाने को सितम अपने तराने गा रहे हो तुम
हमें तो हर कदम पर आज़मा कर तुमने देखा है
वफ़ा की राह से गुज़रे बिना ही जा रहे हो तुम
नज़ारों और बहारों में तुम्हारा अक्स दिखता है
मेरी दीवानगी में हर तरफ बस छा रहे हो तुम
कभी धड़कन में बसते हो कभी हो जाते हो ख़ामोश
मुहब्बत है तुम्हें या बस हमें भरमा रहे हो तुम
तुम्हारी यादों के आँसू लरज़ते मेरी पलकों पर
, छुड़ा कर हाथ अपना इस तरह क्यों जा रहे हो तुम,