जय हो कोरोना वायरस आपराधिक दुनियां के लिए
ब्रह्मदत्त त्यागी हास्य व्यग
सुना है आवाजों की गति से कोरोना मर जाता है चाहे वह गति थाली की हो घंटी की हो चाहे मंदिर के शंख की हो आशा है आप के हंसने से भी कोराना समाप्त हो जाए
[ कोरोना।
मुजरिम को पुलिस अरेस्ट
करने के लिए आई तो वह
दरवाजा खोलते ही मुजरिम
कूहता है कि मैं कोरोना से
पीड़ित हूं चलिए मैं आपके
साथ चलता हूं तो पुलिस
वाले वहां से भाग खड़े हुए
क्रिमिनल के लिए जय हो
कोरोना
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एक
हास्य व्यंग
[ कोरोना ।