'जोनार'
पूरे गाँव में हँसी-ख़ुशी का माहौल है।मुखिया जी के इकलौते पोते की शादी बिना किसी दान-दहेज़ के संपन्न होने जा रही है। वैसे वर-वधु दोनों पक्षवाले आर्थिक दृष्टि से संपन्न हैं,उनकी अपने- अपने गाँव में बड़ी प्रतिष्ठा एवं धाक है।परिवार के बच्चे भी सुशिक्षित एवं समझदार हैं,राजकीय सेवा में ऊँचे पदों पर आसीन हैं। वे विवाह पर
दिखावे और आडम्बर के लिए होने वाले अनावश्यक खर्च को अपने गाँव की तरक्की और पाठशाला के विकास में लगाना चाहते हैं,तथा शादी भी परम्परागत तौर-तरीके से साधारण ढंग से करना चाहते हैं।गांव वाले उनके निर्णय से खुश हैं।
आज जीमनवार का दिन है। सभी-जन जीमने की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं।गाँव के मुखिया जी ने अपने अकेले परिवार की ख़ुशी को पूरे गाँव की ख़ुशी में तब्दील करने के लिए बिना किसी जातिगत भेदभाव के पूरे गाँव को जोनार पर (जीमने के लिए ) आमंत्रित किया है,वह भी लंगर की तर्ज पर बिना किसी छोटे-बड़े का भेदभाव किए दरी-पट्टी पर बैठ कर एक साथ जीमने के लिए ।
ज्ञानप्रकाश 'पीयूष' आर.ई.एस.
सिरसा,हरियाणा।
94145-37902.