प्रेम की भाषा, अपनत्व के छन्द
सुकून के पल,
मैंने जमा कर के रख रही हूँ
ये सोच कर कि
तकनीकी के बाज़ार में इनकी जरूरत किसे
आने वाला समय एण्टी-एजिंग साइंस का जो है
ये मैं रख जाऊँगी उन पीढ़ियों के लिए जो
आधे मशीन बने असन्तुष्ट अवसाद में घिरे
जो खोज रहे होंगे सन्तुष्टि और सृजन के जीन को.....