आज का सुविचार सत्य वचन ब्रह्मदत्त त्यागी
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़।
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उदासियों को भी हंसी बनाना पड़ा...
ताकि अपने उदास ना हो- ब्रह्मदत्त
कुछ दर्द को
दवा
समझ कर पीना
पड़ा ।
क्यू की
दर्द देने वाले अपने
ही थे वह नाराज ना हो...
शिकवा और शिकायत की तो वहां गुंजाइश नहीं
रह जाती...
जहां नाम आ जाता है अपनापन...
और जख्म दिए जाते हैं गैरों से भी बदतर...
लेकिन सबको पीना पड़ता है...
जो जख्म हमें मिला है उसको सीना पड़ता है...
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ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़