सुदंर रचना ..
प्रभु तुमसे एक अरजी हैं ,इस सृष्टि को खुशहाल बना दो ।
नदीयाँ नित कल कल ,छल छल बहती रहे ,कभी न हो रीती ।।
धरती पुत्र कभी उदास न हो ,धन धान्य से सम्पन्न हो जाय ।
धरती हरिभरी सी हो ,धन धान्य से भरी हुई हो ।।
कोई नंगा भुखा ,गरीब न हो ,सबके धर हो समृद्धि ।
शिक्षाविहीन न कोई हो जग में ,सब पर सरस्वती की हो कृपादृष्टि ।।
नफरत ,ईष्या ,द्वेष दुर कर ,प्रेम की गंगा दिलों में भर दो ।
भक्ति की सुदंर सी ज्योत सब के दिलों में जाग्रत कर दो ।।
बिमारीयाँ इस भू पर कभी नही आने पाये ।
ऐसी सुदंर सृष्टि बना दो ,हे मेरे दातार ।।
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