My Comedy Poem...!!!
एक छींक या एक खांसी कि
क़ीमत तुम क्या जानों बाबू...???
एक बलग़म कितना देता है ग़म
एक छूअन कितनी देतीं हैं चूभन
एक वहम ही कितनी लेता है जान
एक दूजें के बीच की दूरी बनी हैं
मजबूरी ये तुम क्या जानो बाबू..??
अच्छे अच्छे जहाँ के सुल्तान बने हैं
आज अनदेखे ही ख़ौफ़ के गुलाम
दहशत-ओ-डरावनी लहरें है आम
पल पल सिसकती जीदगीं सरेआम
जहाँ की हर एक बस्ती भी है बिरान
बुलेट-प्रूफ़-से बख्तर भी हैं नाकाम
उस प्रभु की एक ही क़हर की कमान
करतीं है हर बंदे को तुच्छ-ओ-निम्न
डर-ओ-ख़ौफ़ को तुम क्या जानों बाबू
✍️🥀🌺🌲🙏🙏🙏🌲🌺🥀✍️