संरेखित विचारों को याद रखना असंभव है।
किंतु उन पुरानी याँदों को भुलना संभव नही।
नज़रों को बख्श देती मोहब्बत नाकाम थी।
अलविदा फ़सानों का सिलसिला चला था।
मैं तो ज़िगर थाम के खडा था तेरी राहों में।
मगर कोई भाव न था तेरी निगाहों में।
सबकुछ अब अधोरेखित हो चुका है।
दुनियाँ भुल जाँऊ मगर ये संरेखित रहे गा।
तेरा ग़ुजरा हर पल जिंदगीभर याद रहेगा।
#संरेखित