मेरे चेहरे से जाहिर है,
मेरे लहजे से जाहिर है,
कभी लफ़्ज़ों से भी जाहिर करूं,
कुव्वत अता कर दो,,।
मैं कुछ तो कहने वाला था,
मगर ताकत नहीं मुझ में,
मुझे अपना बना लो तुम,
मुझे हिम्मत अता कर दो,,।
मेरे खोने का डर क्यों है,
मुझे खुद डर है खोने का,
मुझे खोने से रोको तुम,
मुझे सोहबत अता कर दो,।।।।
## प्रदीप##
#जाहीर