I can't afford to be in competition. This is merely expression of view
शिव मंगल सिंह " सुमन " की कविता
" चलना हमारा काम है " का एक अंश
" जीवन अपूर्ण लिए हुए
पाता कभी खोता कभी
आशा निराशा से घिरा
हँसता कभी रोता कभी
गति मति न हो अवरुद्ध
इसका ध्यान आठों याम है
चलना हमारा काम है ...."
#काम
from USA