कविता ..
क्या लिखूँ तेरी याद में ,एक शब्द भी नहीं मिलता ।
लेखनी को समझाऊँ पर ,दिल का कागज नही मिलता ।।
तेरी सूरत इतनी प्यारी ,देख कर भी जी नही भरता ।
याद करुँ तुझे रात दिन ,मिलने का मौका नहीं मिलता ।।
तू तो चाँद का टुकडा ,कोई दुसरा दिल को नहीं जंचता ।
तू प्यार का दरिया ,प्यार करने का एक पल नही मिलता ।।
तेरा रुप तो कमसीन ,अंखियों से भुलाया नहीं जाता ।
स्वर्ग की तू तो अप्सरा ,तुझे अब नही पाया जाता ।।
दुनिया में कयी है ओर ,उनसे अब मिला नही जाता ।
ख्वाबों की रानी तू ही ,अब तुझें भुलाया नहीं जाता ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,वागड़ अंचल ।
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