#चुंबन
कुरूप लड़की का चुम्बन
आर0 के0 लाल
उस लड़की की शादी के लिए तिलकोत्सव 15 दिन पहले ही हुआ था। सोमवार को शादी की रस्म पूरी होनी थी। बरात पहुंची तो लड़के ने लड़की को देख लिया और उसे कुरूप बताते हुए शादी से इन्कार कर दिया। पहले तो लोगों ने मान-मनौव्वल करके मामले को सुलझाने की कोशिश की। लोग समझा रहे थे कि विवाह को जीवन का महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। विवाह के बाद कन्या के गुण ही परिवार को आगे बढ़ाते हैं। जबकि सुंदर परंतु बुरे स्वभाव वाली कन्या विवाह के बाद परिवार तक को तोड़ देती है।
मगर लड़का किसी तरह से राजी नहीं हो रहा था और लड़की भी रोए जा रही थी। इसी तरह घंटो बीत गए पर बात नहीं बनी।
अचानक लड़की का स्वाभिमान जाग उठा। उसने अपना घुंघट उतार फेंका और द्वारचार की जगह पर आकर बोली, "मैं इस लड़के से कदापि शादी नहीं करूंगी इसलिए सभी बाराती वापस यहां से निकल जायें। उसने अपना यह निर्णय भी सबको सुनाया कि अब वह कभी शादी ही नहीं करेगी।
सब ने उससे पूछा कि ऐसा फैसला क्यों ? तो उसने सीधा सा जवाब दिया ।
जब मेरी मां को कोई बच्चा नहीं हो रहा था तो उसने सैकड़ों मंदिरों के चक्कर लगाए और मन्नतें मांगी। तब जाकर मैं पैदा हुई। वह मुझे मेरी भगवान का प्रसाद मानती है और प्यार से मेरा चुम्बन लेती है। अन्य सभी लोग यहां तक कि मेरे पिता एवम् घर वाले जन्म से ही मुझे उलाहना देते रहे हैं और मुझे दुत्कारते रहे हैं। केवल मेरी मां ही अकेली ऐसी है जिसे मेरा बदसूरत चेहरा भी पारियों वाला लगता है। आज वह गंभीर रूप से बीमार है फिर भी चाहती है कि मेरा घर बस जाए।
मैंने प्रण कर लिया है कि शादी करके मैं दूसरे की सेवा नहीं करूंगी बल्कि इसी घर में रह कर अपनी मां की जीवन भर सेवा करूंगी। उसके बुढ़ापे में मैं उसकी मां की भूमिका निभाऊंगी।
यह सुन कर उसके पिता और चाचा भी रोने लगे। सबने कहा तुम हमारी प्यारी बिटिया हो और फिर उसके गालों पर चुम्बन की झड़ी लग गई। यही तो है ईश्वर का वरदान।