खामोशी बोलती है
"नीति अभी तक नहीं लौटी.." सुधा की गेट पर चिपकी आँखे उसकी चिंता बयां कर रहीं थीं।
"आ जाएगी, तुम्हारी समझदार और लायक बेटी वही तो है" भुवनेश निश्चिंत थे।
पर वह बेचैन हो रही थी... नीति उसकी छोटी बेटी वाकई जरूरत से ज्यादा समझदार है। बड़ी बेटी प्रीति जिद्दी और गुस्सैल है।
"मम्मा ये टॉप कितना सुंदर है, मुझे चाहिए ही.." प्रीति ने उसकी कीमत जानकर भी जिद की थी और सुधा को वह खरीदना पड़ा था। तब नीति ने कितनी आसानी से खुद के लिए पसन्द की हुई ड्रेस रिजेक्ट कर दी थी यह कहकर कि.. " दीदी का यह टॉप मुझे ही मिलना है.." सुधा बेटी की समझदारी पर खुश हो गयी थी।
प्रीति की आवाज़ और नीति की खामोशी घर की पहचान बन चुकी थी। खाने में भी प्रीति अपनी पसंदीदा डिश जिद कर बनवाती और नीति चुपचाप दीदी की पसन्द को अपनी पसन्द बनाती रही।
प्रीति कई बार देर से लौटी, तब इतनी चिंता नहीं हुई थी, शायद उसकी बेतरतीबी की आदत हो गयी थी। दोनों बहनें एक ही कमरे में रहती किन्तु बेड और स्टडी टेबल को देखकर ही पहचाना जा सकता था कि कौन सा हिस्सा किसका है। सुधा भी हमेशा नीति की तारीफ करते हुए प्रीति की जिंदगी को संवारने का प्रयास करती रही। नीति को भी उसकी जरूरत हो सकती है, यह सोचने का मौका कभी मिला ही नहीं..!
इसीलिए आज उसका समय पर नहीं लौटना बेचैन कर रहा था। मोबाइल भी स्वीच ऑफ आ रहा था।
अचानक से मैसेज नोटिफिकेशन ने ध्यान भंग किया..
"मम्मी! मेरा इंतज़ार मत करना, आपने हमेशा दीदी को ही पैम्पर किया है, मैं तो आपकी जिंदगी में होकर भी नहीं हूँ। मैं हमेशा इंतज़ार करती रही कि आप मेरा वार्डरोब भी जमाओ, मेरी चादर की सलवटें भी निकालो या कि मेरी किताबें ठीक करते हुए कभी उसमें रखा गुलाब भी देखो और बिना कहे ही मेरी पसंदीदा डिश मेरे सामने परोसो... पर..... आपका फोकस दीदी पर ही रहा हमेशा... नीरव मेरा बहुत ध्यान रखता है.. मैंने अपनी जिंदगी उसके साथ बिताने का फैसला कर लिया है क्योंकि वह मेरे बिना कहे ही मेरी हर बात समझता है। मैं चाहती तो आपसे मिलवा भी सकती थी, फिर लगा कि मेरी जिंदगी में आपने दखल नहीं दिया क्योंकि कभी झांका ही नहीं... इसलिए उससे कोर्ट मैरिज कर रही हूँ।माँ आपका इंतज़ार करूँगी... बाय.."
आज सुधा को पहली बार प्रीति की आवाज़ से ज्यादा नीति की खामोशी का शोर सुनाई दिया...!
©डॉ वन्दना गुप्ता
मौलिक