उनका प्रेम गीत
नदी के किनारे की उस सड़क पर,
जब वो चुपचाप चलते,
तो बांसुरी का संगीत साथ चलता सुनाई देता.
जब बात करते चलते,
तो गोधूलि में वापस आती गायों की घंटियाँ सी सुनाई देतीं.
कई बार चलते चलते थक कर,
वो एक दूसरे की हथेली थाम कर चलने लगते,
तो उन्हें लगता वो बादलों पे तैर रहे हैं.
वो तेज आँधियों में भी,उसी सड़क से जाते थे,
मजबूती से एक दूसरे का हाथ थामकर,
तब उन्हें लगता जैसे वो कोई विजयी सेनापति हैं
और भरी बरसात में, बूंदों से अठखेलियाँ करते हुए.
जब वो उस सड़क से जाते,
तो उन्हें लगता जैसे वो अमृत की बूँदें हैं....
वो क्या है उनके बीच,
जो चुप्पी को बांसुरी में,
शब्दों को घंटियों में,
थकान को बादलों की सैर में
आँधियों को विजय में,
और बारिश की बूंदों को ,
अमृत में बदल देता है.....
प्रेम.......यही है क्या