चिरंजीवी उजाला, देश मेरा निराला
हमारी रातें, हमारे दिन
हमारी कहानियों का सरल सा मन,
देश के गौरव के कदम निराले
उठी भुजाओं में तिरंगे प्यारे।
गंगा की कलकल ,करुणा लिये जल,
भारत की शीतलता, सरल सी स्वतंत्रता,
युगों की विरासत,ऐतिहासिक ये आदत,
हिमालय की विशालता ,अद्भुत सी हिमाद्रिता,
अरण्य में साधुता, मानस में विधाता,
गीत में भारत, वीरता में भरा रक्त,
ज्ञान के कई रंग, महकता ये आंगन,
दिशाओं का उठना,इंसानियत का खिलना,
लोगों का कंठ ,आस्था का झुंड,
उठे ये हाथ, देश के सब साथ,
गंगा की कलकल ,करुणा लिये जल,
चिरंजीवी उजाला, देश मेरा निराला।
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**महेश रौतेला