इस मुस्कराहट के पीछे
किस गम को छुपाये बैठे हो
यूँ किसका इन्तजार है
जो बरसो से चराग जलाये बैठे हो
खूबसूरती देख लगता है
कई दिलो से खेला है तुमने
और अब किसी बेवफा से
दिल लगाये बैठे हो
तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे; मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे; तुम्हारे बस में अगर हो तो भूल जाओ हमें; तुम्हें भुलाने में शायद मुझे ज़माना लगे!