चंडी(लघुकथा)
उसके चढते ही बस चल पडी थी।बस मे केवल तीन लोग बैठे थे,जो दारू पी रहे थे।उनको देखकर वह सहम गई।उसने इस बस मे चढकर गलती की थी।अपनी गलती सुधारने के लिए वह चिल्लाई ,"बस को रोको"।
लेकिन डॉईवर ने उसकी बात को अनसुना कर दिया।तीनों लोग शराब पीना छोडकर उस पर झपटे।वह उनसे बचने के लिए बस मे इधर उधर भागने लगी।जब बचने की कोई सूरत नजर नही आयी, तब उसने जोर से अपना हाथ खिडकी के शीशे पर दे मारा।शीशा टूट गया।टूटे शीशे का लम्बा नुकीला टूकडा हाथ मे ले लिया।अपनी तरफ झपट रहेआदमी के पेट मे शीशे का टुकडा घुसेडते हुए बोली,"ऐसे नही मानेगा तू"।
उस आदमी के पेट से खून बहने लगा।उस युवती का रौद्र रूप देखकर बाकी दो घबराकर चलती बस से कूद गये।