सारी उम्र लगा दी सिखाने में,
"थोड़ा सुन लिया करो",
"बर्दाश्त करना सीखो", 'तुम नज़रअंदाज किया करो"..
और फिर उसके चुपचाप सहते रहने पर कहना..
"कैसे सह लिया इतना सब" "हमें तो बता देते"..।
आप बच्चों को संस्कार में ग़लत और सही का फ़र्क तो सिखाते हैं लेकिन उन्हें उस ग़लत के विरोध में बोलना भी सिखाइये।
किसी भी रिश्ते को बनाए रखने के लिए, आज की खामोशी, उसे हमेशा ग़लत के आगे खामोश कर देगी।
#रूपकीबातें