बेहिसाब होता है
. जब होता है
इश्क़
सच कहूं
इसका जवाब नहीं
लाजवाब होता है
इश्क़
बेघर है ये
इसका कोई घर नहीं
कभी मेरे दिल में
कभी तेरे दिल में
वक़्त के साथ
अपने हिसाब से
रंग बदलता है
इश्क़
बेपनाह है
सैलाब सा है
किसी के काबू में नहीं
हर कहीं रहता है
रूप बदल बदलकर
सच कहूं
खुद
खुदा है
इश्क़