मां आज तेरी याद फिर आई ,
हंसते-हंसते फिर एक बार ये आंखें भर आई l
समझ नहीं आया तू क्यों ना आए ,
बस तेरी यादें आकर मुझमें समाई ll
आज तेरा आशीष मांगने के लिए यह सिर फिर झुका ,
पर तेरा स्पर्श नहीं ,
सर्द हवा के झोंकों ने,
ये सिर को आकर छुआ ।।
आज तू होती तो कितना खुश होती ,
फिर एक बार मेरा माथा चूमती ।
पर तू नहीं आई ,
सूरज के गर्म किरणों ने,
इस माथे को आकर चुम्मा ।।
तू ना आई बस तेरी यादें आई ।।