आखिर कब तक??
============
(चिंतन--सत्य घटना पर आधारित)
क्या...????
एकदम से चौंक गई थी डॉ सुष्मिता......
बात ही कुछ ऐसी थी...
उनके क्लीनिक में उनके सामने एक 20 वर्षीय किशोरी बैठी थी जो यूटेरस का ऑपेरशन करवाने आयी थी।
"जी ऐसा है कि हमारे गाँव में बच्चे होने के बाद बच्चेदानी निकलवा देते हैं।" साथ आई 21 वर्षीय किशोरी ने कहा... मैंने भी 2 बच्चों के बाद यही किया है। इसके भी 3 बच्चे हो गए हैं, नहीं निकलवाई तो लेन लग जायेगी हम गरीब कैसे पालेंगे इत्ते बच्चों को...
"हाँ पर ये एकमात्र उपाय नहीं है, अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है?? आजकल तो 25 साल के पहले शादी ही नहीं करना चाहती लड़कियाँ और तुम सिर्फ 20 की उम्र में तीन बच्चों को जन्म देकर यूटेरस निकलवाने आ गयी??"
".........."
"खैर जो हुआ उसे नहीं बदल सकते पर मैं तुम्हें इस ऑपेरशन की हरगिज इजाजत नहीं दे सकती... और भी उपाय हैं, नहीं अपनाना चाहो तो नसबंदी का ऑपेरशन कर देती हूँ.."
डॉ सुष्मिता ने समझाने की कोशिश की...
"जी मैडम पर उससे माहवारी तो बंद न होवे है"... वह धीरे से बुदबुदाई...
"देखो ऐसा है कि यूटेरस निकलवाने से दूसरे कई कॉम्प्लिकेशन हो जाएंगे, फिर अभी तुम्हारी उम्र ही कितनी है... बीमारियां घर कर गई तो कैसे काटोगी जिंदगी... " डॉ ने फिर समझाने की कोशिश की..
"जी मैडमजी बात ये है कि... " वह सकुचाई..
"हाँ हाँ खुलकर बोलो क्या बात है..."
"जी वो ऐसा है कि महीनों के दिनों में रसोई में काम नहीं कर सके, सो...."
"तो क्या...."
"तो बच्चादानी निकलवाने से सब झंझट से छूट जाएंगे... घर का काम भी पूरे महीने कर सकेंगे और टेंशन फ्री भी रहेंगे..."
सहज शारीरिक प्रक्रिया के टैबू में उलझी ये मानसिकता आखिर कब तक औरतों की जान जोखिम में डालती रहेगी???
©डॉ वन्दना गुप्ता
मौलिक