Hindi Quote in Poem by Anamika Pravin Sharma

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तुम और तुम्हारे भ्रम की दुनियां
अक्सर मुझे भरमाते हैं
जब तुम कहते हो ये घर तुम्हारा है
यहाँ की हर चीज़ पर हक़ है तुम्हारा
शायद कुछ काम याद आ जाया करता है तुम्हें

जब तुम कहते हो तुम आज़ाद हो
तुम्हारा भी अपना अस्तित्व है
मुझे यूँ ही भ्रमित कर पैरों में बेड़ियां भी बांध देते हो
मैंने तुम्हें कब रोका कब टोका
हर बार यही तो कहकहकर भरमाया है मुझे

मुँह खोल जब भी बोलना चाहा कुछ
सेलो टेप से चिपका दिए तुमने मेरे होंठ
ज्यादा बोलने से अहमियत कम हो जाती है
कितने अज़ीब से तर्क देकर हर बार हराया है मुझे

तुम और तुम्हारे भ्रम की दुनिया
अक्सर मुझे भरमाते हैं
और मैं भावुक मूढ़ सदियों से
तुम्हारे भ्रमों का आवरण ओढ़
गहन निद्रा में स्वप्न सँजोती रहती हूँ
इसी भ्रम की दुनिया में विचरण करती रहती हूँ

©®
अनामिका प्रवीन शर्मा
मुंबई

Hindi Poem by Anamika Pravin Sharma : 111317927
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