हम तो बेकार ही दोष देते थे लोगों को,
यहाँ तो मौसम-ए-बेवफ़ाई हवाओने पाल रखा हैं...
सोचता था कि ख़ुदगर्ज़ है लोग यहाँ,
लेकिन हालात-ए-हक़ीक़त ने ख़ुदगर्ज़ बना रखा है...
चेहरे के है अनेक रूप ,
हर रूप में अलग अन्दाज़-ए-बयाँ छिपा रखा है ....
हम तो बेकार ही दोष देते थे लोगों को ....।
-Akashsingh