अपने यौवन को भुलाकर,
त्याग कर एक सुडोल काया..
उठाकर अन्य भार शरीर में अपने,
और अपने जीवन को मृत्यु की दहलीज तक पहुंचाकर,
पुरुष नहीं औरत तुमको जन्म देती है..
केवल इसी सोच से उसका सम्मान कर लेना।
माँ बनने को केवल ईश्वरीय रचना मत समझो।
क्योंकि औरत स्वयं में प्रकृति है..
अगर वो सँवार सकती है,तो नष्ट भी कर सकती है।
#रूपकीबातें