My New Poem ...!!!!
तू ज़िम्मेदार है
मेरी उदास आंखों का
तू मान जा हिफाज़त
वफ़ा की नहीं हुई तुझसे
आँधी-अधूरी-सी में
बहकी तेरी बातों में
ज़िक्र तो तूने चाँद-सितारों
का किया था पहले मिलन में
पर दिखाए तूने तारे मुझे
महज बहकावे के रिंदों में
औक़ात से बढ़ कर सबूत
होता है कम्बख़्त आस्तीनों में...!!
आज के दौर में मोहब्बत वो खोटा
सिक्का हैं मुफ़्तमें चलता बाज़ार में..!!
मासुम-सी बच्चियाँ बहकतीं पाती
सज़ा दरिंदों की नापाक साज़िशों में..!!
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