माखनलाल चतुर्वेदी जी की कविता पुष्प की अभिलाषा से प्रेरित मेरी कुछ तुकबन्दी...
***स्टूडेंट्स की अभिलाषा***
चाह नहीं कम्बल में लेटूँ
मधुबाला के नगमे गाऊं
चाह नहीं होटल पे बैठ
बीड़ी सिगरेट सुलगाऊँ
चाह नहीं हिन्दू-मुस्लिम कर
पब्लिक में दंगे भड़काऊं
चाह नहीं चमचागिरी कर
नेता के जूते सहलाऊँ।
मुझे बुला लेना हे! साथी
हर उस चौराहे और चौक
जहां जुटे हों देश बचाने
युवा नागरिक देशभक्त अनेक।।
-सिराज अंसारी