हे कृष्ण(१)
हे कृष्ण
मुझे शुद्ध कर दो,
बेजान हूँ तो
जानदार कर दो।
क्रूर हूँ तो
दयावान बना दो,
अपवित्र हूँ तो
पवित्र कर दो।
शत्रु हूँ तो
मित्र बना दो,
लयहीन हूँ तो
लय दे दो।
अशान्त हूँ तो
शान्ति थमा दो,
शुद्र हूँ तो
विराट बना दो।
कर्महीन हूँ तो
कर्मशील कर दो,
मर्त्य हूँ तो
अमर्त्य बना दो।
विरल हूँ तो
अविरल कर दो,
अविचार हूँ तो
विचार बना दो,
जड़ हूँ तो
चेतन कर दो।
**महेश रौतेला