My New Poem ...!!!
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*अच्छे लोगों की इज्जत*
*कभी कम नहीं होती*
*सोने के सौ टुकड़े करो,*
*फिर भी कीमत*
*कम नहीं होती*।
*आईने के सौ टुकड़े करो, *
*फ़िर भी तस्वीर*
*धुँधली नही होती*।
*भूल होना "प्रकृत्ति" है,*
*मान लेना "संस्कृति" है,*
*और उसे सुधार लेना "प्रगति" है.*
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