यूँ बैमौसम बहारों का आना
और उस पर तेरा भी आना
बड़ा लुभाये तेरा मुस्कुराना ,
हँस कर मेरे दिल में बश जाना
रोज मेरे सपनों में तुम आना
बात बात पर यूँ हमें सताना
और जब रूठुं तो हमें मनाना
तू ही बता ऐ दिल,
फिर क्यूँ नहीं भाये हमें
बैमौसम बारिश का आना
Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित