My New Poem...!!!!
बातों से मिले जख़्म तो
जनाब बहुत गहरे होते हैं
कत्ल भी हो जाते हैं और
खंजर भी नही दिखते हैं..!
अदाकारी जालसाज़ी रिया-कारी
मुट्ठी-से मगज में क्या नहीं होता..?
द्वन्द-युद्ध बुराई पे अच्छाई का तो
मस्तिष्क में हर वक़्त चलता रहता
दिल-औ-दिमाग़ के इस मह-युद्ध में
सदियोंसे जीत पर दिलकी होती आई हैं
प्रभुजी खुद जहाँ बसत रहत हो
वहाँ तो हार को ही हारना पड़ता है ।
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