कभी तुमसे मिलना नसीब नहीं हुआ
में अक्सर तुममें मेरा अक्ष खोजता था
तुम रूबरू भी हुई कभी तो वो तुम न थी
तुम तुम बनकर मुझसे मिल सकती थी
' गर एक दफा तुमने तुममें जांका होता
इस बात कि खुशी मनाऊ की तुम हो
या इस बात का रंज की तुम तुम नहीं हो
ये मसले दिल के सुलझ भी सकते थे
अगर तुम मुजमे ; मुज्मे उलझ जाती
हवा के झोंके से तुम्हारी जुल्फों की खुस्बू
सांसों में अब भी महकती रहित है ; लेकिन
जिंदा होना सिर्फ सांसो का चलना नहीं होता
- "उपेन"