My New Poem ....!!!
अदावत में तो उसकी आज भी अंतर नहीं आया,
ताज्जुब है बहुत दिन से कोई पत्थर नहीं आया।
उसे दो मील पैदल छोड़ने जाता था मैं बस तक,
मैं उसके घर गया वो गेट तक बाहर नहीं आया।
चढ़ा हूँ देख कर हर एक सीढ़ी सावधानी से,
जहाँ पर आज हूँ मैं उस जगह उड़ कर नहीं आया।🍁🍁
सितारों ने ग्रहों ने साज़िशें तो दट़ कर कि जीदगीं में,
सिला क़िस्मतों के कमजफँ खोखले बहानों का भी मिला
होंसले तो पर चट्टानों से अड़ंगे थे
बे-बाँक-औ-मज़बूत थे
कुछ मेहनत कुछ प्रभु दया-द्रष्टि से बंदा बना चंगा।
✍️🌺🌲🌴🙏🙏🙏🌴🌲🌺✍️