My New Poem ...!!!
😂😡😋
शहर बसा कर अब सुकून😋
के लिए गांव ढूंढते हैं....😋
बड़े अजीब लोग हैं...😋
हाथ में कुल्हाड़ी लिए...😡
छांव 😡 ढूंढते हैं...!!
जीदगीं की राहों में बोएँ..😋
सीमेन्ट-कौँक्रीट के पेड़ 🌲
अनगिनत नादान मुसाफ़िर..😡
अब बारिशों की चाह ढूँढते है..!!
ख़लल क़ुदरत के मिज़ाज में 😇
खिलवाड़ मौसम के ऋतु-चक्र में
प्यदा कर पागल-से बंदे आँजके
पैसों में ही जीवन की राह ढूँढते हैं
तकनीकी ईज़ादों में भूला बैठे हैं
जीवन-मूल्यों को, ना-समझ-से
प्रभु-प्रार्थना में भी स्वार्थ ढूँढते है
✍️🌹🌲😈🙏😈🌲🌹✍️