"खुशी ढुंढने से नहीं बल्कि महसूस करने से मिलती है। यकिनन आपको याद भी नहीं होगा कि आप आखिर में कब खुलकर हंसे। आपके अंदर रहा बचपना उम्र के लिहाज से दफ़न मत करो उसे खुलकर जीओ। ओर याद रखें खुशी खरीदने से नहीं मिलती बचपना बांटने से मिलती है।"
-हितेश डाभी 'मशहूर'