मैं भी तुम भी और रात भी यहीं हैं
मगर दोनों की सोच चादर ओढ़ कर सो गई…
अल्फ़ाज़ कहीं टहलने निकल गए
हालात ने आवाज़ को डरा रखा हैं…
रात की ठण्ड साँसों के साथ जिस्म में उतर रही हैं
बस ये चार आँखें एक दूसरे से पूछ रही हैं…
तवील उम्र जीयेंगे या काटेंगे
इसका जवाब कौन देगा??
रात की ख़ामोशी या चाँद की ये रौशनी…