*नाकाम प्रयास*
रोशनी को ढकने की नाकाम कोशिश हैं तुम्हारी,
मुकम्मल नहीं हो पाएगी
क्योंकि तुम सुरज को दिया दिखाने का साहस कर रहे हो
और आसमां को झुकाने का नाकाम प्रयास!
तुम बखुबी जानते हो
तुम सुरज से निखर नहीं सकते
तुम आसमां चिर नहीं सकते
फिर भी हर मुमकीन कोशिश कर रहे हो
तुम्हारी भले मंशा है
सुरज और आसमां को पैरों तले रौंधकर ऊंचा उठने की
लेकिन मंजिल तक पहुंच नहीं पाओगे
क्योंकि तुम ना सुरज तक पहुंच सकते हो
ना ही आसमां को ढक सकते हो
अगर तुम्हे कोई मुकाम पाना है तो
उनमें नुक्स निकालने की बजाय
खुद पर ध्यान देना बेहतर होगा
वह सुरज है खुद की रोशनी निरंतर रखेगा ही
भले बादल छाए, लेकिन
सुरज तो होगा ही अपनी निखार सजाये
वह आसमां है, सबको पनाह देगा ही
सबको एक-सी बारिश, धुप देगा
और अपने रोब में रहेगा
तुम उनमें ऐब निकालने की बजाय
खुदके ऐब ढुंढकर कोई मंजिल तय करो
जिसे आप पा सको, कामील बना सको!
- ©मितवा ?