उसकी एक झलक के लिए
मैने उसकी गली के बच्चो को
लड़वा दिया.. कास इसी बहाने
आ जाए खिड़की पे..
चार ही तो कपड़े थे उसने सुखाए
फिर भी बार बार आ जाती थी
छत पे...
पूरे महोल्ले ने सुन ली मेरी आवाज
कितना जोर से चिल्लाया था में
सायद आ जाए वो बाहर
बर्तन पूरे गिरा दिए थे उसने
धीरे धीरे वो समेट रही थी
मा बोली कल तक तो समेट लेगी ना
वो दौर ही अलग था प्यार दिखा के छुपाने का
कितने बहाने बनाते एक नजर देखने को.
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एक वो जमाना था जब प्यार का मतलब भी दोस्ती था..