??
निर्भय हो निर्भया, नहीं साँस ले पाई जहाँ
क्या बात करें उस शहर,गाँव,गली की।
आज प्रियंका, कल फिर कोई अनामिका
अस्तित्व जिसका हो जाएगा तार तार।
सह रही है वर्षों से घर-बाहर तिरस्कार,
कब तक चुप बैठे और सहे अत्याचार?
बोलने दो बहन- बेटियों को आज,अभी
वरना 'काली' बन करेगी दुष्टों का संहार।
बेटियाँ ही हैं क्यों संस्कारों की ठेकेदार,
बेटों को भी क्यों नहीं देते हैं संस्कार?
??