मैं जमीं से जुड़ा हूँ तुम फलक की बात करते हो
अंधेरा तुममें शामिल है और बेवजह रात कहते हो
कहने को तो ये मिलना भी है तारीफ के काबिल
सूरत देखने भर को ही बस मुलाकात कहते हो
क्या खूब है ऐ खुदा तुम्हारी नासमझी की सरहदें
गिरी दो बूंद जो तुम सावन की भरी बरसात कहते हो
सम्भाले नहीं जो टुकड़े वो अब दिल पे घाव कर रहे हैं
अपनी बेपरवाही को तुम बिगड़े हुए हालात कहते हो❤️?