घाव नासूर हो जाता है !
कब?
जब बार बार दर्द का एहसास कराया जाए ?
कोई पूछे, अबे वो छोड़ गई तुम्हे?
कोई पूछे यही मिलते थे न तुम दोनों?
कोई पूछे वो तो कहती थी कि शादी करेगी तुमसे?
कोई कहे कि वो तो कहती थी कि तुम्हारे बिना मर जाएगी?
कोई कहे 'बड़का भरोसा करते थे तुम तो'
कोई पूछे कि क्यो छोड़ गई न? अरे हम पहले ही बोले थे?
कोई कहे कि हम पहिलही कहे थे कि लड़की छोड़ो फ्यूचर पर ध्यान दो ?
अब कैसे कहें इन सालो से कि तुम ही हमारी फ्यूचर थी,तुम ही जिंदगी, तुम ही सुकून और तुम ही सब कुछ !
नही कह पाते!
नही कह पाते कि तुम्हारा प्यार धोखा नही था!! तुम धोखेबाज नही थी ! हमारा साथ धोखा नही था !
नही कह पाते !
नही कह पाते कि तुमने मुझे छोड़ा नही था !
तुमसे मुझे छुड़ाया गया था,किसी सिगरेट की लत की तरह !
हाँ यही कुछ बात है जो नही कह पाता मैं किसी से !
और फिर इन सवालों से उभर जाते हैं पुराने घाव !
और बन जाते हैं नासूर !