बाल - दिवस के उपलक्ष में, सभी प्यारे बच्चों को समर्पित एक रचना।
शीर्षक - खेल कूद
समझ में आ गई बात हमारी
खेल कूद है सब पर भारी
खेल कूद में नहीं खराबी
शौक है लल्ला
ये तो नवाबी
स्वस्थ रहना है तो खेलो कूदो
करो व्यायाम,
यूं ही पहेलियां ना बूझो
होगा शरीर मजबूत,
दूर हटेगी बीमारी
करो परिश्रम,
नाम जानेगी तुम्हारा,
दुनिया ये सारी
कस लो कमर,
लो सीना तान
ऐसा खेलो,
दुनिया में रोशन रहे हिन्दुस्तान
बहाओ पसीना,
लगाओ जान
हर देश लेहरा दो तिरंगा,
बढ़ाओ देश की शान
जय - हिन्द, जय - हिन्द की हो गूंज
हर ओर
तिरंगा लहराकर,
मचा दो यह शोर
खेले मुन्ना, खेले मुन्नी,
खेले हर नर - नारी
नन्ही पलटन,
प्रतियोगियों को देगी टक्कर करारी
जीत का परचम लहराने की है,
अब हम में खुमारी
स्वर्ण पदक लाने की तुम
अब करो तैयारी
जनहित में हो बात यह जारी
खेल कूद से भी होगी
खत्म बेरोजगारी
तो, बात आ गई समझ में तुम्हारी
कि, खेल कूद है सब पर भारी।
- अभिषेक शर्मा(Instant ABS)