दोहा मुक्तक
1.
श्रेष्ठ समय का खण्ड यह, लिखा सुखद इतिहास
न्याय धर्म रंजित हुआ, पूर्ण सभी की आस
धूल भूल से थे लगे, धुले पुराने दाग
साक्षी हूँ इस समय का, यही खुशी है ख़ास।
2.
सालों से सुनते रहे, बक-बक सब जन आम
सबको है उम्मीद यह, मिल जाए आराम
भांड भिड़ें जो बॉक्स पर, रोज सांझ हर चैन
उनके भी हिय शांत कर, भली करेंगे राम।
©सतविन्द्र कुमार राणा