English Quote in Poem by Abhishek Sharma - Instant ABS

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शीर्षक - "उत्तराखंड भ्रमण"

निहारा मैंने देश - परदेस, निहारे मैंने विभिन्न क्षेत्र हैं
अभिमुख हुआ मैं धरती के खण्ड - खण्ड से
पर ना देखा मैंने उत्तराखंड सा अनूठा राज्य - क्षेत्र है

आओ आपको एक सफ़र पर लेकर चलते हैं
धरती पर अवतरित स्वर्ग में लेकर चलते हैं।

मेरे उत्तराखण्ङ की बात बड़ी निराली है
जहां तक नजर पहुंचे, बस हरियाली ही हरियाली है
यहां पर्वत श्रृंखला अपार है, झरनों की भरमार है
एक छोर कुमाऊं, तो दूजे छोर गढ़वाल है।

चाहे ले चलूं मैं चारो - धाम या घुमाऊं भुवनेश्वर पाताल या जागेश्वर धाम,
विश्व प्रसिद्ध उत्तर के आंचल के हर क्षेत्र में है, देवों का धाम,
एक पक्ष 'आदि कैलाश' शांति सूचक लिए, खड़ा विकराल है
तो, दूजे पक्ष अपार नीर से लबालब टिहरी - डाम है।

आबोहवा का करूं में जिक्र, तो मौसम की नहीं है, यहां फिक्र
सूरज की तपन चर्म पर पहुंचे, तो मौसम स्वतः करवट लेता है
सुहावनी हवाएं चलने लगती है, पूरा उत्तराखण्ड बादल का आंचल ओढ़ लेता है
एक तरफ पहाड़ों की रानी, तालों में यहां ताल नैनीताल है
जहां बदला जो रुख तो दूजी तरफ, पौड़ी स्थित जहरीखाल - गुमखाल है।

दून घाटी एक मात्र राज्य की संचालक है
योगी जहां योग करें, वह ऋषिकेश परिपालक है
निर्मल मां - गंगा की आरती जहां होती, वह कुंभनगरी विद्यमान है

इस राज्य जैसा कोई राज्य नहीं, यहां ऋषि मुनि महान हैं
एक छोर पर मिलते गढ़वाली अरसे रसदार हैं,
तो दूजे छोर पर स्थित अल्मोड़ा की प्रसिद्ध
बाल और पटाल है।

देह के द्वार से, जहां खुलता आत्म मोक्ष का द्वार है
हर की पौड़ी जहां स्थित, परम - पावन यहां हरि का द्वार है
एक तरफ पिंडारी नदी, तो दूजे छोर बहती नदी
भागीरथी - अलकनंदा की सुगम धार है
मिले जहां दोनों प्रसिद्ध संगम कर्णप्रयाग व देवप्रयाग हैं।

आओ आपको एक सफ़र पर लेकर चलते हैं
धरती पर अवतरित स्वर्ग में लेकर चलते हैं।

- अभिषेक शर्मा(Instant ABS)

English Poem by Abhishek Sharma - Instant ABS : 111285524
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