मसले ये जिन्दगी के कभी हल ना होंगे,
इन्हे आज ही खत्म कर दो,
तो यह कभी कल ना होंगे
क्यों झुक जातें हैं खुशियों से, भरे पेड़ भी
जानते हैं शायद जो फल आज हैं,
मुमकिन है कि वो कल न होंगे
नफरत के आगे घुटने टेक देगी गर हमारी अच्छाई,तो कयामत होगी
ना थामा हमने गर इंसानियत और सच का दामन,
तो ऐसे मंजर के गुनहगार हम ही होंगे
मसले ये जिन्दगी के कभी हल ना होंगे,
इन्हे आज ही खत्म कर दो,
तो यह कभी कल ना होंगे।