तहज़ीब से पेश आना मुझसे
आज़मगढ़ में पली बढ़ी।
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।
ऋषियों की पावन भूमि है जो
गंगा घघरा के बीच बसा।
मैं उस मिट्टी की उपज हूँ
जहाँ वीरों ने इतिहास रचा।।
छोटे शहर की भले ही हूँ
लेकिन खुद की एक पहचान मेरी।
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।
तहज़ीब से पेश आना मुझसे
आज़मगढ़ में पली बढ़ी।
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।
साहस की मुझमें कमी नहीं
अलग करने का कुछ ठाना है।
लक्ष्य मेरा कोई कुआँ नहीं
बड़े समंदर को पाना है।।
समय आए तो बताना है का
मेरे सामने क्या औकात तेरी
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।
तहज़ीब से पेश आना मुझसे
आज़मगढ़ में पली बढ़ी।
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।
मैं कोई नाजुक कोमल सी गुड़िया नहीं
ना मैं फूल हूँ गुलाब का
मन भर जाए तो फेक दो मुझको
या कदर न हो मेरे जज्बात का।
मसल के मुझको फेक दो
अफसोस न हो इस बात का
मैं कोई जलती अंगार नहीं
गिर तुझपे तेरी सख्शियत मिटाऊँगी
हाँ गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।
तहज़ीब से पेश आना मुझसे
आज़मगढ़ में पली बढ़ी।
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।
ऐसा नहीं सिर्फ चामुण्डा हूँ
सती और पार्वती भी हूँ।
जो भी मुझसे प्यार करे
उसके लिए प्रेममयी भी हूँ
रिश्तों की रक्षा करने को
सबसे आगे खड़ी भी हूँ।
ग़र कभी मिटाना चाहो इस
दुनिया से सख्शियत को मेरी
बस एक बात समझले तू
खुद से पहले तुझको मिटा डालुंगी
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।
तहज़ीब से पेश आना मुझसे
आज़मगढ़ में पली बढ़ी।
गिरेबान पर हाथ जो डालोगे
तो मिट्टी में लाकर पटकूँगी।।