रहा समय राति के ढाई का जब गैस चढि गवा सीने मा ।
दिन आजु आखिरी आय गवा हम लोटय लाग जमीनै मा ।
मलिकन भगवानै का सुमिरैं ओ लागि चटावय कछु भभूत ।
समुझै राही मा मिला हवै तुमका कौनौ करर्वा भूत ।
फिरि करिया लोन जवाइन मा घोंटि गरे मा डारि दिहिन ।
अब कहैं कछू तुम धरौ धीर हमतौ पूरा उपचार कीन ।
पर दरद नहीं कम होय रहा ऊ तौ सुरसा कय मुँह होइगा ।
भा बेरोजगारी भारत कय जनसंख्या कय बढ़ती होइगा ।
रोईपीटि कय कटी राति होतै विहान गयन अस्पताल ।
आपातकाल मा गयन लेटि जइसै अब आवा मोर काल ।
जमुहात डाकदर बोलि उठै बोलौ तुमका है का हुइगा ।
हम संकेतय मा बोलि दीन सीना मा दरद हमैं उठिगा ।
बिनु सोचे समुझे बोले ऊ तू करौ पैंट अब तनिक ढील ।
सूई चुभिका दुईव ओर एक उऊर दरद कय भया फील।
हम सोचेन शायद बस हुइगा अब दरद हमार खतम होई ।
हम अपने घरै निकरि जाबै मलकिन कय सोचब कम होई ।
तुरतय कन्पोटर बाबू आए बोले तुम हाथ करौ आगे ।
बिनु यहि सुई के लगै तुम्हार दरद नहीं तनिकौ भागे ।
नस मा सुई ऊ दिहिन ठोंकि दुई बूँद खून लीनिन्हन निकारि ।
मन किहिस ससुर के नाती का दुई तीन रापटा देइ उतारि ।
फिर ब्लड प्रेशर नापि लिहिन औ ई.सी.जी भी कय डारिन ।दुइ चारि दवाई लिखि कय ऊ हमरै मुँह पर दय मारिन
अब सोचि लीन अपने मन मा आपातकाल मा जाब नहीं।
गैसेक गोली दुई चारि धरब चाभब जब होई दरद कहीं ।