दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
एक माटी का दिया
स्वयं जलकर दूसरों का उजाला बन सको।
किसी एक के जीवन का अंधेरा हर सको।
एक माटी का दिया संदेश हमको दे रहा।
चाक पर चढ़ता हूँ और आग में तपता।
कड़ी धूप में सूख, नए स्वरूप में ढलता।
परेशानी से निकलकर दीपमाला बन सको।
एक माटी का दिया संदेश हमको दे रहा है।
जाति धर्म की सीमा से जो होता है परे।
धरती - गगन को शुचिता से हरदम भरे।
जगत में पूजित हो मन का शिवाला बन सको।
एक माटी का दिया संदेश हमको दे रहा।
नयेपन के आवरण में चमक कम हुई।
बिजलियों के लट्टुओं में वह गुम हुई।
लेकिन तुम डरो मत, टिके रहकर,
पग से पग बढाकर देशहित वाला बन सको।
एक माटी का दिया संदेश हमको दे रहा।
डॉ अमृता शुक्ला